सतना। जिले में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी क्या बाजार के हवाले है? क्या, प्रशासन की आंख में धूल झोंक कर माफिया खुले बाजार की घटिया धान उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर बेंच कर मालामाल हो रहा है? इस मसले पर बड़े खुलासों के साथ कलेक्टर-एसपी और जिला आपूर्ति अधिकारी के पास अलग-अलग पहुंचीं किसानों की अनेक शिकायतों के बाद स्वाभाविक रुप से यहां इस किस्म के सनसनीखेज सवाल उठे हैं।
ऐसे खुली पोल : 5 गांवों के 26 किसानों से फ्रॉड
बाजार की घटिया धान,समर्थन मूल्य के सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेंचने की नायाब तरकीब का खुलासा यहां हाल ही में तब हुआ,जब कोटर तहसील क्षेत्र के मलगांव, मझियार, घुंघचिहाई, हिनौती और सेल्हना गांव के तकरीबन 26 किसानों को खरीदी केंद्रों में पंजीकृत करने से इंकार कर दिया गया। किसानों को तर्क दिया गया कि उनकी आराजियां पहले से ही न केवल पंजीकृत हैं,बल्कि किसान पंजीयन कोड भी जारी किए जा चुके हैं। किसानों ने जब अपने स्तर पर पूछ परख की तो पता चला कि कूटरचित दस्तावेजों की दम पर वो तो ठगे जा चुके हैं।
इसे ऐसे समझें: पर्दे के पीछे हैं, 4 किरदार
घुंघचिहाई निवासी किसान रामलाल सिंह पिता स्व.गया सिंह की ओर से कलेक्टर से की गई शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि गल्ला कारोबारी विवेक गुप्ता पिता रामनिवास (मलगांव) ने सेवा सहकारी समिति कुआं के कम्प्यूटर आपरेटर दीपक सिंह पिता रामसुरेश सिंह निवासी बरदाडीह (कोटर)से साठगांठ कर उनके स्वत्व की कृषि योग्य आराजियों को बतौर बटाईदार दर्ज कराते हुए छलपूर्वक 15 अक्टूबर को उपार्जन केंद्र में समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री के लिए किसान कोड (पंजीयन क्रमांक- 219300277687) प्राप्त कर लिया। आरोप है कि बाजार की घटिया धान,उपार्जन केंद्र में बेंचने के लिए गल्ला व्यापारी विवेक गुप्ता ने 8 अन्य किसानों के साथ भी ऐसा ही छल किया। छले गए किसानों में देवलाल मल्लाह, रामपाल द्विवेदी (दोनों निवासी मलगांव), अंगद सिंह (मझियार), श्यामसुंदर, गरुणध्वज वगैरह, ममता शर्मा और पुष्पेन्द्र सिंह (सभी निवासी घुंघचिहाई) भी शामिल हैं।
आर्थिक धोखाधड़ी के आरोपों की पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि उपार्जन मूल्य के भुगतान के लिए यूनियन बैंक बाबूपुर का जो एकाउंट (नंबर - 626902010007139 ) दर्ज कराया गया है,वो खाता भी विवेक गुप्ता के नाम पर है।
पिता-पुत्र और एक अन्य :---
ये किस्सा यहीं खत्म नहीं होता है। किसानों ने विवेक गुप्ता के पिता रामनिवास पर भी ऐसे ही आरोप हैं। मझियार निवासी किसान अयोध्या यादव समेत 10 किसानों के आरोप हैं कि उनके स्वत्व की आराजियां दर्शा कर रामनिवास गुप्ता पिता रामावतार ने एक अक्टूबर को किसान पंजीयन कोड (कमांक-218120340224) प्राप्त कर लिया। इस पंजीयन में भी रामनिवास गुप्ता का एसबीआई की बिरला कालोनी ब्रांच का खाता (नंबर-33638150141) लिंक है। जिन अन्य किसानों ने रामनिवास पर चारसौबीसी के आरोप लगाए हैं उनमें मलगांव निवासी भगदारी , लालमन, रामबहादुर और चुटइया वगैरह। मझियार निवासी गोपी सिंह, बृजेश सिंह, घुंघचिहाई के भइया लाल, हिनौती के राजेन्द्र प्रसाद और सेलहना निवासी रीता सिंह तथा रतनमाला सिंह शामिल हैं। इसी तरह मलगांव निवासी सुनीता गुप्ता पत्नी रामयश गुप्ता के खिलाफ भी 8 किसानों ने ऐसी ही धोखाधड़ी की शिकायत कलेक्टर से की है। किसान लालभाई पिता रामानुज मल्लाह के आरोप के मुताबिक उनके स्वत्व की आराजियों के साथ कूटरचना करते हुए सुनीता गुप्ता के नाम पर 16 अक्टूबर को किसान पंजीयन (क्रमांक- 219301420737) प्राप्त कर लिया। भुगतान के लिए इस पंजीयन के साथ सुनीता गुप्ता का एसबीआई की गोरइया ब्रांच का एकाउंट लिंक है।
ये है मुनाफे का सीधा सा गणित :-------
समर्थन मूल्य पर गुणवत्ता पूर्ण धान की खरीदी जहां सरकार लगभग 18 सौ 15 रुपया प्रति क्ंिवटल के हिसाब से करती है। वहीं बाजार में इसी धान के एवज में किसान को प्रति क्ंिवटल पर महज 13 सौ 50 रुपए ही मिलते हैं। साफ है कि प्रति क्ंिवटल पर कम से कम 450 रुपए का खेल होता है। जानकारों का मानना है कि बाजार के घटिया धान को उच्चतम मूल्य पर खपाने में माहिर माफिया, गुपचुप किसानों से छल कर ये खेल कर रहा है। उल्लेखनीय है,मौजूदा समय में समर्थन मूल्य पर 65 केंद्रों में धान की खरीदी चल रही है। इसके लिए 39 हजार 813 किसान रजिस्टर्ड हैं। इनसे सवा 2 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों का 58 हजार 309 हेक्टेयर रकबा रजिस्टर्ड है।
इनका कहना है
मामला संज्ञान में है। जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
डा.सतेन्द्र सिंह, कलेक्टर